बॉलीवुड के ‘बैड मैन’ गुलशन ग्रोवर आज किसी पहचान के मोहताज नहीं उनकी जिंदगी का दिलचस्प किस्सा बहुत कम लोगों को पता है। Gulshan Grover Struggle Story में उनकी शुरुआत रामलीला में वानर का किरदार निभाने से जुड़ी है, जहां उन्हें मेहनताने के तौर पर एक गिलास दूध और केले मिले थे।
रामलीला के वानर से बॉलीवुड के ‘बैड मैन’ तक
बॉलीवुड में जब भी दमदार खलनायकों की बात होती है तो गुलशन ग्रोवर का नाम जरूर सामने आता है। पर्दे पर उनकी आवाज, अंदाज और खतरनाक किरदारों ने उन्हें ऐसी पहचान दिलाई कि लोग उन्हें ‘बैड मैन’ के नाम से जानने लगे। लेकिन फिल्मों में अपनी अलग जगह बनाने वाले गुलशन ग्रोवर का अभिनय से रिश्ता बहुत छोटी उम्र में ही जुड़ गया था।
उनकी जिंदगी से जुड़ा एक किस्सा खास तौर पर दिलचस्प है। करीब पांच साल की उम्र में उन्होंने रामलीला में वानर सेना के एक सदस्य का किरदार निभाया था। इस काम के बदले उन्हें रुपये नहीं, बल्कि एक गिलास दूध और केले मिले थे।
पांच साल की उम्र में मिला अभिनय का पहला मौका
Gulshan Grover Struggle Story की शुरुआत दिल्ली से होती है। गुलशन ग्रोवर का जन्म और पालन-पोषण दिल्ली में हुआ। अभिनय से उनका पहला परिचय भी यहीं हुआ।
उनकी आत्मकथा से जुड़ी प्रकाशित जानकारी के अनुसार, गुलशन जब लगभग पांच साल के थे, तब उन्होंने दिल्ली के बाहरी इलाके में आयोजित होने वाली रामलीला में हिस्सा लिया था। उन्हें हनुमान जी की वानर सेना में एक वानर का किरदार मिला।
सबसे दिलचस्प बात उनकी पोशाक और मेहनताने से जुड़ी है। बताया जाता है कि उन्होंने अपनी मां की चुन्नी की मदद से अपने किरदार की पोशाक तैयार की थी। अभिनय के बदले उन्हें एक गिलास दूध और केले खाने को मिले। एक छोटे बच्चे के लिए यह अनुभव शायद उस समय सामान्य रहा हो, लेकिन आगे चलकर यही बच्चा हिंदी सिनेमा के सबसे पहचाने जाने वाले कलाकारों में शामिल हुआ।
क्या गरीबी के कारण दूध और केले के लिए बने थे वानर?
इस किस्से को इंटरनेट पर कई जगह इस तरह पेश किया जाता है कि गुलशन ग्रोवर बेहद गरीब थे और सिर्फ दूध तथा केले पाने के लिए वानर का किरदार निभाते थे।
हालांकि उपलब्ध जानकारी से यह बात जरूर सामने आती है कि उनका शुरुआती जीवन साधारण था और उन्हें संघर्षों का सामना करना पड़ा, लेकिन यह कहना कि उन्होंने केवल गरीबी या भूख के कारण वानर का किरदार किया था, पूरी तरह पुष्ट नहीं है।
ज्यादा सही तथ्य यह है कि बचपन में रामलीला में वानर का किरदार निभाने के बदले उन्हें दूध और केले मिले थे। इसलिए इस दिलचस्प किस्से को उनकी जिंदगी की शुरुआती अभिनय यात्रा के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा।
पढ़ाई के साथ अभिनय की तरफ बढ़ता गया रुझान
गुलशन ग्रोवर ने दिल्ली में पढ़ाई की और आगे चलकर श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से शिक्षा हासिल की। इस दौरान अभिनय में उनकी दिलचस्पी लगातार बढ़ती गई।
उन्होंने थिएटर में काम किया और कई स्टेज प्रोडक्शन का हिस्सा बने। बाद में फिल्मों में करियर बनाने के इरादे से मुंबई का रुख किया। वहां उन्होंने अभिनय की बारीकियों को और करीब से सीखा।
शुरुआती दौर में बड़े कलाकार की तरह तुरंत पहचान नहीं मिली। छोटे अवसरों और लगातार मेहनत के बाद उनका फिल्मी सफर आगे बढ़ता गया।

विलेन बनने के फैसले ने बदल दी पहचान
Gulshan Grover Struggle Story हिंदी फिल्मों में गुलशन ग्रोवर ने धीरे-धीरे यह समझ लिया कि खलनायक के किरदारों में वह अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। इसके बाद उन्होंने निगेटिव किरदारों पर खास ध्यान दिया।
उनका अंदाज दूसरे फिल्मी विलेन से अलग दिखाई देता था। बोलने का तरीका, चेहरे के भाव और किरदार को अलग पहचान देने की उनकी कोशिश दर्शकों को पसंद आने लगी।
‘राम लखन’, ‘सौदागर’, ‘मोहरा’, ‘दूध का कर्ज’ और ‘हेरा फेरी’ जैसी कई फिल्मों में उनके किरदारों को दर्शकों ने याद रखा। इसी लंबे फिल्मी सफर के दौरान ‘बैड मैन’ उनकी पहचान का हिस्सा बन गया।
कटरीना कैफ के साथ सीन को लेकर भी रहे चर्चा में
Gulshan Grover Struggle Story सिर्फ उनके शुरुआती दिनों तक सीमित नहीं है। फिल्मी करियर में उनसे जुड़े कई दिलचस्प किस्से सामने आते रहे हैं।
साल 2003 में रिलीज हुई फिल्म ‘बूम’ में गुलशन ग्रोवर ने कटरीना कैफ के साथ काम किया था। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन भी अहम भूमिका में थे।
गुलशन ग्रोवर बाद में बता चुके हैं कि कटरीना के साथ रोमांटिक सीन करना उनके लिए आसान नहीं था। अमिताभ बच्चन की मौजूदगी के कारण भी वह असहज महसूस कर रहे थे। सीन को सही तरीके से करने के लिए फाइनल शॉट से पहले गुलशन और कटरीना ने उसकी कई बार प्रैक्टिस की थी।
यह फिल्म कटरीना कैफ के शुरुआती फिल्मी सफर का भी हिस्सा थी और इसके कुछ सीन लंबे समय तक चर्चा में रहे।
एक छोटे किरदार से बना लंबा फिल्मी सफर
Gulshan Grover Struggle Story करीब पांच साल की उम्र में रामलीला की वानर सेना का हिस्सा बनने वाले गुलशन ग्रोवर ने शायद उस समय नहीं सोचा होगा कि अभिनय ही आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी पहचान बनेगा।
दूध और केले के रूप में मिले उस शुरुआती ‘मेहनताने’ से लेकर हिंदी सिनेमा के ‘बैड मैन’ कहलाने तक उनका सफर काफी दिलचस्प रहा है। Gulshan Grover Struggle Story की सबसे खास बात यही है कि अभिनय का जो सिलसिला बचपन में रामलीला के एक छोटे से किरदार से शुरू हुआ, उसने आगे चलकर उन्हें बॉलीवुड के सबसे चर्चित खलनायक कलाकारों में जगह दिलाई।
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